
मुड़ीडीह में पेड़ पर झूलते समय गले में फंसा साड़ी का फंदा, शिक्षकों के पहुंचने से पहले हुआ हादसा; गांव में पसरा मातम
सरायपाली/बसना। महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र अंतर्गत मुड़ीडीह गांव से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। शासकीय प्राथमिक शाला परिसर में खेलते समय साड़ी से बने झूले में फंसकर कक्षा चौथी के एक मासूम छात्र की मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जिस स्कूल परिसर में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां इस घटना के बाद मातम छा गया।
खेलते-खेलते हुआ दर्दनाक हादसा
मृतक छात्र की पहचान तरुण चौहान के रूप में हुई है, जो शासकीय प्राथमिक शाला मुड़ीडीह में कक्षा चौथी का विद्यार्थी था। मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले बच्चे परिसर में पहुंचकर खेल रहे थे। स्कूल परिसर में स्थित एक पेड़ पर बच्चों ने साड़ियों को बांधकर झूला बनाया था। तरुण भी अपने करीब आठ-नौ साथियों के साथ उसी झूले पर खेल रहा था।
इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया। नीचे गिरते समय साड़ी से बना झूला उसके गले में फंस गया और वह फंदे में लटक गया। घटना को देखकर अन्य बच्चे घबरा गए और शोर मचाने लगे। हालांकि, तब तक तरुण की मौत हो चुकी थी। इस हादसे ने खेल रहे बच्चों और उनके परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया।
शिक्षकों के पहुंचने से पहले हुआ हादसा
भंवरपुर चौकी प्रभारी अंजना चंद्रा के अनुसार, स्कूल खुलने का निर्धारित समय सुबह करीब 10 बजे है। बच्चे रोजाना की तरह सुबह 9:30 बजे के आसपास स्कूल परिसर में खेलने पहुंच गए थे। घटना वाले दिन भी स्कूल की सहायिका सुबह करीब 9:30 बजे स्कूल खोलकर चली गई थी, जबकि उस समय तक शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे थे।
इसी दौरान बच्चे पेड़ पर चढ़कर साड़ी से बने झूले में खेल रहे थे और अचानक यह दर्दनाक हादसा हो गया। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद मौत से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल खुलने से पहले परिसर में पहुंचने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पेड़ों पर बांधे गए असुरक्षित झूलों को हटाना तथा बच्चों को ऐसे खतरनाक खेलों से दूर रखना बेहद जरूरी है। एक छोटी-सी लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और पूरे गांव को गमगीन कर दिया।



