Saraipali

थियोडोलाइट सर्वेक्षण की तकनीक से रूबरू हुए महाविद्यालय के विद्यार्थी

आयुष साहू 9926141516

सरायपाली महाविद्यालय में भूगोल परिषद ने आयोजित की एक दिवसीय कार्यशाला, विशेषज्ञ ने उपकरण की कार्यप्रणाली और व्यावहारिक प्रशिक्षण की दी जानकारी

सरायपाली। स्व. राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय, सरायपाली में भूगोल परिषद के तत्वावधान में ‘थियोडोलाइट सर्वेक्षण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों से परिचित कराना तथा भूगोल विषय के व्यावहारिक पक्ष को मजबूत बनाना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञ ने थियोडोलाइट उपकरण की कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय सर्वेक्षण में इसकी उपयोगिता की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शासकीय माता कर्मा कन्या महाविद्यालय, महासमुंद के भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक ओ.पी. पटेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष एम.एन. सिदार ने की, जबकि प्रभारी प्राचार्य श्रीमती शब्या पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

प्रयोगात्मक ज्ञान से विकसित होती है विषय की समझ

कार्यक्रम के प्रारंभ में भूगोल विभागाध्यक्ष एम.एन. सिदार ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भूगोल केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसमें प्रयोगात्मक ज्ञान और क्षेत्रीय सर्वेक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विद्यार्थियों के कौशल विकास को ध्यान में रखते हुए भूगोल परिषद भविष्य में भी इस प्रकार के उपयोगी कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।

विशिष्ट अतिथि एवं प्रभारी प्राचार्य श्रीमती शब्या पटेल ने भूगोल परिषद की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से विद्यार्थियों में व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित होता है। साथ ही, उन्हें विषय की बारीकियों को समझने और शोध के प्रति रुचि बढ़ाने का अवसर मिलता है।

थियोडोलाइट की कार्यप्रणाली और सर्वेक्षण तकनीक की दी जानकारी

मुख्य वक्ता ओ.पी. पटेल ने विद्यार्थियों को थियोडोलाइट उपकरण के विभिन्न घटकों, उसकी कार्यप्रणाली तथा क्षेत्रीय सर्वेक्षण में उसके उपयोग के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से ऊर्ध्वाधर कोणों के मापन की तकनीक को समझाते हुए बताया कि सर्वेक्षण कार्य में इस उपकरण का सटीक उपयोग महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि भूगोल के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगात्मक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। थियोडोलाइट जैसी सर्वेक्षण तकनीकों का ज्ञान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध कार्य और भविष्य में संबंधित क्षेत्रों में आगे बढ़ने में मददगार साबित हो सकता है। व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों को उपकरण के उपयोग और सर्वेक्षण की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा

कार्यशाला में सहायक प्राध्यापक सत्य प्रकाश खड़बंधे एवं देवेश राणा सहित स्नातक स्तर के एनईपी पाठ्यक्रम तथा स्नातकोत्तर भूगोल के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ सर्वेक्षण की वास्तविक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। इस प्रकार का आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक कौशल को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।

प्रखर मीडिया

सरायपाली, मह्समुन्द

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