बारिश की लंबी खेंच से सूखने लगी धान की फसल, खेतों में पड़ी दरारें; किसानों की बढ़ी चिंता
आयुष साहू 9926141516

*खरीफ सीजन के अहम दौर में पानी की कमी से धान के पौधे पड़ने लगे पीले, सिंचाई के सीमित साधनों के बीच फसल बचाने की जद्दोजहद*
सरायपाली। खरीफ सीजन में धान की फसल अब अंतिम अवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में फसल को पर्याप्त पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन क्षेत्र में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों की जमीन सूखने लगी है और कई स्थानों पर दरारें पड़ने से धान की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पानी के अभाव में धान के पौधे पीले पड़कर मुरझाने लगे हैं, जिससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है।
*बारिश नहीं होने से खेतों में बढ़ा सूखे का असर*
क्षेत्र में करीब पखवाड़े भर से अधिक समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी लगातार कम हो रही है। जिन खेतों में धान की फसल लहलहानी चाहिए, वहां अब सूखती जमीन और मुरझाते पौधे दिखाई देने लगे हैं। धान की बालियों के विकास और दानों के भरने के महत्वपूर्ण समय में पानी की कमी फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
*सिंचाई के लिए किसानों को करनी पड़ रही मशक्कत*
फसल को बचाने के लिए किसान अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। कई किसान नदी-नालों और कुओं से पंप के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने में जुटे हैं। हालांकि, सभी किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बारिश पर निर्भर किसानों के सामने फसल को बचाने की चुनौती और गंभीर हो गई है।
*उत्पादन प्रभावित होने की आशंका*
धान की फसल के इस महत्वपूर्ण चरण में लंबे समय तक पानी की कमी बनी रहने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो धान की पैदावार घट सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खरीफ की फसल किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है, इसलिए मौसम की बेरुखी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
*बारिश की उम्मीद में आसमान पर टिकी निगाहें*
क्षेत्र के किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों का कहना है कि समय पर वर्षा होने से खेतों में नमी लौट सकती है और फसल को राहत मिल सकती है। फिलहाल बारिश की कमी के बीच किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल को बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।



