
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुर्गापाली में सर्पदंश से बचाव एवं जन-जागरूकता को लेकर कार्यशाला आयोजित कर विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई। विद्यालय की कक्षा 12वीं में अध्ययनरत छात्राएं रागिनी पटेल एवं तमन्ना पटेल को पिछले दिनों जहरीले सर्प करैत एवं कोबरा द्वारा डसे जाने के बाद उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। घटना से आहत विद्यालय के प्राचार्य निमंकर पटेल एवं शिक्षकों ने यह जागरूकता अभियान शुरू किया है।
कार्यशाला में बताया गया कि वर्षा ऋतु में सर्पों के घरों, आंगन, लकड़ी-कंडे, झाड़ियों तथा अन्य सुरक्षित स्थानों में प्रवेश करने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए घर के आसपास झाड़ियां, कचरा और अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना चाहिए। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च या पर्याप्त रोशनी का उपयोग करने तथा जूते, कपड़े और बिस्तर इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी गई।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि घर में सर्प दिखाई देने पर उसे पकड़ने या मारने का प्रयास नहीं करना चाहिए और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए। सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय प्रभावित व्यक्ति को शांत रखते हुए अनावश्यक चलने-फिरने से बचाएं और तत्काल नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। सर्पदंश को गंभीर आपातस्थिति मानते हुए शीघ्र चिकित्सकीय उपचार लेना आवश्यक है।
विष विज्ञान की दी जानकारी
विज्ञान व्याख्याता शिवप्रसाद पटेल ने प्रमुख विषैले सांपों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कोबरा और करैत का विष मुख्यतः न्यूरोटॉक्सिक होता है। इससे पलक गिरना, निगलने और सांस लेने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। करैत के काटने पर कई बार दर्द और सूजन कम दिखाई देती है, लेकिन बाद में सांस की मांसपेशियों में लकवा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर के विष से रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे रक्तस्राव और किडनी को नुकसान का खतरा रहता है। वहीं स्केल्ड वाइपर के विष से भी रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होने तथा सूजन जैसी समस्या हो सकती है। उन्होंने बताया कि भारत में किंग कोबरा, बैंडेड करैत और विभिन्न प्रजातियों के पिट वाइपर भी पाए जाते हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों एवं ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें तथा सर्पदंश से बचाव के उपायों के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करें।



