सरायपाली में तीन माह से स्कूल सफाई कर्मचारियों का भुगतान अटका, बीईओ की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
आयुष साहू 9926141516

रक्षाबंधन पर भी नहीं मिला वेतन; 10 हड़ताली कर्मचारियों के खाते में भुगतान होने का दावा, बैंक स्टेटमेंट व दस्तावेजों से जांच की मांग
सरायपाली। रक्षाबंधन के त्योहार के बीच सरायपाली ब्लॉक के अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारियों के लंबित भुगतान का मामला गरमा गया है। छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ, ब्लॉक सरायपाली ने जून, जुलाई और अगस्त—तीन माह का भुगतान लंबित होने का आरोप लगाते हुए शिक्षा विभाग की भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संघ ने 28 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप, जांच और लंबित भुगतान जारी कराने की मांग की है।
संघ का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के समय भी कर्मचारियों को भुगतान नहीं मिला है। सीमित आय में परिवार चलाने वाले कर्मचारियों के सामने तीन माह का वेतन लंबित होने से आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। कर्मचारियों का सवाल है कि नियमित भुगतान की व्यवस्था होने के बावजूद जून से अगस्त तक भुगतान क्यों अटका हुआ है।
10 हड़ताली कर्मचारियों के भुगतान का दावा
मामले में कर्मचारियों ने सबसे गंभीर सवाल यह उठाया है कि हड़ताल में शामिल 10 कर्मचारियों के खातों में भुगतान जमा होने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनके पास बैंक स्टेटमेंट, हस्ताक्षर सहित अन्य दस्तावेज मौजूद हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का भुगतान किया गया है, तो अन्य कर्मचारियों का भुगतान किस आधार पर रोका गया? संघ ने सभी कर्मचारियों के भुगतान में समान नियम और पारदर्शिता की मांग की है।
भुगतान में मनमानी और लेन-देन का आरोप
कर्मचारियों ने भुगतान प्रक्रिया में कथित लेन-देन और मनमाने तरीके से भुगतान किए जाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारियों को भुगतान मिल रहा है, जबकि अन्य कर्मचारी अपने बकाया वेतन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति वेतन बिल, भुगतान आदेश, बैंक रिकॉर्ड, उपस्थिति और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल पूछने पर धमकी देने का आरोप
कर्मचारियों ने भुगतान को लेकर सवाल उठाने पर कथित तौर पर धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपने वैध भुगतान की मांग कर रहे हैं।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो यह भी जांच का विषय होगा। संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बीईओ कार्यालय के बजाय चारभांठा स्कूल में वेतन संबंधी कार्य क्यों?
कर्मचारियों के अनुसार उनका वेतन संबंधी लेखा-जोखा और प्रशासनिक कार्य बीईओ कार्यालय सरायपाली से जुड़ा है। इसके बावजूद वेतन संबंधी कार्य चारभांठा स्कूल में किए जाने की बात सामने आई है।
इसे लेकर कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि चारभांठा स्कूल में वेतन संबंधी कार्य किस आदेश और किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है तथा इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की है। संघ ने संबंधित आदेश और पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
बीईओ टीकम चंद्र पटेल की कार्यप्रणाली पर कर्मचारियों ने उठाए सवाल
कर्मचारियों ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी टीकम चंद्र पटेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि भुगतान के मामले में मनमानी की जा रही है। नाराज कर्मचारियों ने अपनी प्रतिक्रिया में यहां तक कहा कि “बीईओ अपने आप को मंत्री समझ रहे हैं।”
यह बयान कर्मचारियों की नाराजगी और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को दर्शाता है। इस संबंध में बीईओ टीकम चंद्र पटेल अथवा शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना आवश्यक है।
रक्षाबंधन पर भुगतान नहीं, तो त्योहार कैसे मनाएं?
स्कूल सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी आय सीमित है। ऐसे में तीन माह का भुगतान लंबित होने से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ त्योहार का खर्च उठाना भी मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों ने जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करने की मांग की है।
₹8,860 के कथित दोहरे भुगतान की भी जांच की मांग
मामले से जुड़े एक अन्य बिंदु में लमकेनी एमएस स्कूल के कर्मचारी बसंत बेहरा के नाम पर जून, जुलाई और अगस्त की कुल ₹8,860 राशि के कथित दोहरे भुगतान की बात भी सामने आई है।
फिलहाल यह भी शिकायत/दावा है। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित वेतन बिल, भुगतान वाउचर, बैंक रिकॉर्ड और भुगतान सूची का मिलान आवश्यक होगा। यदि एक ही अवधि और मद में राशि वास्तव में दो बार जारी हुई है, तो भुगतान की प्रक्रिया और जिम्मेदारी की जांच भी जरूरी होगी।
दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
संघ ने मांग की है कि जून, जुलाई और अगस्त के सभी कर्मचारियों के वेतन बिल, भुगतान सूची, बैंक ट्रांजेक्शन, हस्ताक्षर, उपस्थिति एवं हड़ताल संबंधी रिकॉर्ड तथा भुगतान आदेशों की जांच कराई जाए।
संघ के अनुसार जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि—
– तीन माह का भुगतान किन कर्मचारियों का रोका गया और क्यों?
– हड़ताल में शामिल 10 कर्मचारियों को भुगतान हुआ या नहीं?
– यदि भुगतान हुआ तो किस आदेश के आधार पर?
– चारभांठा स्कूल में वेतन संबंधी कार्य किस आदेश से कराया जा रहा है?
– भुगतान प्रक्रिया की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
– ₹8,860 के कथित दोहरे भुगतान की वास्तविकता क्या है?
– लेन-देन और धमकी से संबंधित आरोपों में कितनी सच्चाई है?
छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद सहित उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, लंबित भुगतान जारी करने तथा जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि तीन माह के लंबित भुगतान और भुगतान प्रक्रिया को लेकर उठे इन सवालों पर शिक्षा विभाग क्या जवाब देता है और दस्तावेजों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
नोट: समाचार में लेन-देन, धमकी, मनमाने भुगतान तथा ₹8,860 के दोहरे भुगतान संबंधी बातें कर्मचारियों/संघ द्वारा लगाए गए आरोप अथवा दावे के रूप में दी गई हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित बीईओ एवं शिक्षा विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना आवश्यक है।



