नुआखाई पर्व पर 15 सितंबर को स्थानीय अवकाश घोषित होने पर सांसद एवं कलेक्टर का जताया आभार
आयुष साहू 9926141516
नुआखाई पर्व पर 15 सितंबर को स्थानीय अवकाश घोषित होने पर सांसद एवं कलेक्टर का जताया आभा
सरायपाली। ऋषि पंचमी के अवसर पर मनाए जाने वाले नुआखाई पर्व के दिन 15 सितंबर को स्थानीय अवकाश घोषित किए जाने पर बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज ने सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी एवं महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुशी जाहिर की है।
संभागीय महामंत्री मथामणी बढ़ाई एवं सचिव ललित साहू ने बताया कि नुआखाई पर्व पश्चिमी ओडिशा के साथ-साथ फुलझर अंचल और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में उड़िया संस्कृति को मानने वाले बड़ी संख्या में लोगों का प्रमुख पर्व है। इस पर्व को क्षेत्र में बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
बताया गया कि पूर्व में महासमुंद कलेक्टर द्वारा 18 सितंबर 2026 को नुआखाई पर्व के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया गया था, जबकि नुआखाई पर्व इस वर्ष 15 सितंबर को ऋषि पंचमी के दिन मनाया जाना है। इससे स्थानीय अवकाश को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
समाज के प्रबुद्धजनों ने इस संबंध में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी से भेंट कर वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। सांसद ने तत्काल कलेक्टर से चर्चा कर स्थानीय अवकाश की तिथि में संशोधन करने का आग्रह किया। इसके बाद संशोधित आदेश जारी करते हुए 15 सितंबर को स्थानीय अवकाश घोषित कर दिया गया। इस निर्णय से समाज एवं क्षेत्रवासियों में हर्ष व्याप्त है।
मीडिया प्रभारी कमलेश साहू ने बताया कि नुआखाई पर्व प्रतिवर्ष भाद्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह आपसी भाईचारे, एकता और नई फसल के स्वागत का पर्व है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान नई फसल की खुशहाली के अवसर पर इस त्योहार को विशेष उत्साह से मनाते हैं।
नुआखाई के अवसर पर गांव से बाहर रहने वाले परिवारजन भी अपने घर लौटकर परिजनों के साथ पर्व मनाने की परंपरा निभाते हैं। किसानों की मेहनत जब खेतों में हरियाली और फसलों की बालियों के रूप में दिखाई देती है, तब उस खुशी को नुआखाई जैसे पर्व के माध्यम से मनाया जाता है।
समाजजनों ने बताया कि पहले अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तिथियों पर नुआखाई मनाने की परंपरा थी, लेकिन अब अधिकांश स्थानों पर ऋषि पंचमी के दिन ही नुआखाई पर्व मनाया जाता है। स्थानीय अवकाश घोषित होने से शासकीय कर्मचारी, अधिकारी एवं स्कूली बच्चे भी अपने परिवार और समाज के साथ इस महत्वपूर्ण पर्व में शामिल हो सकेंगे।



