
अब कलेक्टर परिसर में भूख हड़ताल की चेतावनी, जमीन, पेड़, डबरी और मुआवजे को लेकर उठाए सवाल
सरायपाली। क्षेत्र में स्थापित सोलर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण पिछले करीब सात महीनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ है। अब ग्रामीणों ने कलेक्टर परिसर में अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों के मुताबिक, स्थानीय विधायक द्वारा भी सोलर पावर प्लांट का मुद्दा विधानसभा में उठाया जा चुका है। वहीं ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय के सामने करीब दो महीने तक धरना देकर अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखी थीं।
250 एकड़ आवंटन, 400 एकड़ घेराबंदी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी को करीब 250 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन प्लांट प्रबंधन द्वारा लगभग 400 एकड़ भूमि में घेराबंदी किए जाने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भूमि का सीमांकन एवं भौतिक सत्यापन कराकर यदि अतिरिक्त भूमि पर कब्जा पाया जाता है तो उसे मुक्त कराने की मांग की है।
पेड़ों की कटाई और डबरियों को पाटने का आरोप
ग्रामीणों ने प्लांट निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि काटे गए पेड़ों के बदले अब तक अपेक्षित क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण नहीं कराया गया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच और वृक्ष कटाई से संबंधित अनुमति व अभिलेखों की जांच की मांग की है।
इसके अलावा ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट क्षेत्र में तीन शासकीय डबरियों को भी पाट दिया गया है। उनका कहना है कि इससे आने वाले समय में जल संकट गहरा सकता है और खेती-किसानी प्रभावित हो सकती है।
कचरा प्रबंधन और पर्यावरण को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने प्लांट क्षेत्र में कचरे के ढेर पड़े होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे प्रदूषण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने कचरे के उचित निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्लांट के कारण क्षेत्र के तापमान और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। हालांकि तापमान में वृद्धि संबंधी दावे की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होगा।
मुआवजा और रोजगार का मुद्दा
ग्रामीण किशोर मेहर का आरोप है कि सोलर प्लांट आने के बाद क्षेत्र के करीब 90 परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है और पिछले सात महीनों से धरना जारी है। उन्होंने सरपंच द्वारा कथित रूप से फर्जी प्रस्ताव तैयार किए जाने का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्लांट क्षेत्र में अभी और पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
एसडीएम बोले- मामला कलेक्टर के संज्ञान में
इस मामले में एसडीएम मनोज कुमार खांडे ने कहा कि सोलर पावर प्लांट से जुड़े सभी मामले कलेक्टर के संज्ञान में हैं, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे नए पदस्थ हुए हैं। भूमि संबंधी आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित आवंटन से अधिक भूमि लिए जाने की शिकायत है तो आवेदन प्रस्तुत कर सीमांकन एवं सत्यापन कराया जा सकता है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में भूमि का सीमांकन एवं सत्यापन, कथित अतिरिक्त भूमि को मुक्त कराना, पेड़ों की कटाई की जांच, नियमानुसार क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण, शासकीय डबरियों का पुनर्जीवन, कचरा प्रबंधन, प्रभावित परिवारों को मुआवजा तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शामिल है।



