
तुलसी साहित्य ने भक्ति को लोकजीवन, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा : खगेश कुमार पटेल
सरायपाली। स्व. राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय, सरायपाली के हिंदी विभाग द्वारा ‘भक्तिकालीन कवियों में तुलसीदास और रामचरितमानस’ विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संध्या भोई ने की।
मुख्य वक्ता श्री खगेश कुमार पटेल, सहायक प्राध्यापक हिंदी, शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय बिल्हा, जिला बिलासपुर ने विषय विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने तुलसीदास के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसीदास भक्तिकालीन हिंदी साहित्य के ऐसे महत्वपूर्ण कवि हैं, जिन्होंने भक्ति को लोकजीवन, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर उसे व्यापक लोकचेतना का स्वर प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि ‘रामचरितमानस’ केवल रामकथा का पुनर्सृजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकमंगल, मर्यादा, समन्वय और आदर्श जीवन-मूल्यों का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने तुलसीदास की काव्य-दृष्टि, भगवान राम के लोकनायक स्वरूप तथा ‘रामचरितमानस’ की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. चंद्रिका चौधरी ने किया। संचालन आरती साहू ने किया, जबकि कु. रीना साव ने आभार प्रदर्शन किया। अतिथि व्याख्यान में हिंदी विभाग के विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थी एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को तुलसी साहित्य एवं भक्तिकालीन काव्य की समृद्ध परंपरा को समझने तथा उसके साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्त्व से परिचित होने का अवसर मिला।



