यात्रा के अनुभवों को शब्दों में पिरोया, कमलेश साहू की पुस्तक ‘यात्रा अनुभूति’ का विमोचन
आयुष साहू 9926141516

सरायपाली। शिक्षकीय दायित्वों के साथ साहित्य लेखन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके कमलेश साहू की यात्रा-वृत्तांत आधारित पुस्तक ‘यात्रा अनुभूति’ का विमोचन रायपुर के वृंदावन हॉल में साहित्य जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की मौजूदगी में हुआ। नव छत्तीसगढ़ साहित्य एवं सांस्कृतिक संस्थान, रायपुर के तत्वावधान में आयोजित पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकारों ने पुस्तक की विषयवस्तु और लेखक के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाषाविद् डॉ. चितरंजन कर रहे। अध्यक्षता लेखक, स्तंभकार एवं कवि संजीव कुमार ठाकुर ने की। साहित्यकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा प्रमुख वक्ता तथा डॉ. सीमा रानी प्रधान, कवि सुरेंद्र रावल और कवि रामेश्वर शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित हुआ। प्रथम सत्र में कमलेश साहू की पुस्तक ‘यात्रा अनुभूति’ का विमोचन किया गया। पुस्तक पर चर्चा करते हुए कार्यक्रम अध्यक्ष संजीव कुमार ठाकुर ने कहा कि पुस्तक लिखना और उसे पाठकों के समक्ष लोकार्पित करना लेखक के लिए नन्हे शिशु को जन्म देने जैसा अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि यात्रा में आने वाले संघर्ष और कठिनाइयां ही आगे चलकर सुखद एवं मधुर स्मृतियों में बदल जाती हैं।
उन्होंने यात्रा-वृत्तांत लेखन की परंपरा का उल्लेख करते हुए राहुल सांकृत्यायन, अज्ञेय, निर्मल वर्मा, महादेवी वर्मा और फणीश्वरनाथ रेणु जैसे साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यात्रा-वृत्तांत एक महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा है, जिसमें स्थान, दृश्य, व्यक्ति, संस्कृति, इतिहास, अनुभव, आत्मचिंतन और निष्कर्ष को साहित्यिक शैली में प्रस्तुत किया जाता है।
प्रमुख वक्ता डॉ. माणिक विश्वकर्मा ने पुस्तक के विभिन्न आयामों की समीक्षा करते हुए कहा कि कमलेश साहू ने यात्रा-वृत्तांत को सरल और सहज शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे हैं। मुख्य अतिथि डॉ. चितरंजन कर ने साहित्य की विभिन्न विधाओं और सरल लेखन की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केदारनाथ से लेकर बस्तर तक की यात्राओं का वर्णन जिस सहजता से किया गया है, वह लेखक की लेखन-कौशल को दर्शाता है। सरल लिखना ही सबसे कठिन है।
लेखक कमलेश साहू ने बताया कि उन्होंने अपनी विभिन्न यात्राओं के दौरान प्राप्त अनुभवों और अनुभूतियों को पुस्तक के रूप में अभिव्यक्त किया है। पुस्तक का उद्देश्य केवल यात्रा स्थलों का वर्णन करना नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान महसूस किए गए अनुभवों, भावनाओं और जीवन से जुड़े पहलुओं को पाठकों तक पहुंचाना है।
लेखन के क्षेत्र में सक्रिय पहचान
कमलेश साहू शिक्षकीय कार्य के साथ लंबे समय से साहित्य एवं लेखन से जुड़े हुए हैं। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ राज्य मुख्यालय द्वारा पहली बार प्रकाशित ‘प्रयास’ का संपादन भी उनके द्वारा किया गया है। इसके अलावा हाई स्कूल रोहिना की वार्षिक पत्रिका ‘बढ़ते कदम’ के संपादन का दायित्व भी वे निभा रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख, आलेख और कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं।
इस अवसर पर राजेंद्र रायपुरी, छविलाल सोनी, यशवंत चतुर्वेदी, सुनील पाण्डेय, मंजूषा अग्रवाल, बलजीत कौर, सीमा पाण्डेय, पल्लवी झा, यशवंत यदु, शकुंतला तिवारी, रूनाली चक्रवर्ती, कल्याणी तिवारी, मन्नूलाल यदु, भूपेंद्र शर्मा, विजय मिश्रा, डॉ. पूनम साहू, डॉ. जगदीश साहू, विवेक रहटगांवकर, पल्लवी रावटे, बी.डी. रावटे, अनिता झा, डॉ. लोकेश्वर प्रसाद सिन्हा, टीकेश्वर सिंह मरकाम, महेंद्र पटेल, तरुण साव, रविश गुप्ता, माधुरी कर, डॉ. उदयभान सिंह, आनंदराम साहू, राधेश्याम बंसल और अंजना केरकेट्टा सहित साहित्य जगत से जुड़े अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।



