बस्तीपाली में माता इक्कीसो बहिनियां देवठाना में देवी यज्ञ, हवन-पूजन और महाआरती के बाद भोग-भंडारा संपन्न
आयुष साहू 9926141516

नौ दिनों तक चले नवरात्रि अनुष्ठान का विधि-विधान से हुआ समापन, 21 कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर किया गया पूजन; गोंडवाना की प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक परंपराओं का हुआ निर्वहन
बस्तीपाली। फुलझर राज्य रियासत की 18वीं शताब्दी की प्राचीन ऐतिहासिक राजधानी बस्तीपाली स्थित जगत जननी माता इक्कीसो बहिनियां देवठाना (मातागुड़ी) में आश्विन शुक्ल नवमी एवं विजयादशमी के पावन अवसर पर देवी यज्ञ, हवन-पूजन, विश्व कल्याण एवं शांति की कामना के साथ पूर्णाहुति, महाआरती और भोग-भंडारे का आयोजन विधि-विधान से संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता रानी की आराधना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान में गोंडवाना की पारंपरिक संस्कृति, पूर्वजों की पूजा-पद्धति और नवाखाई की परंपराओं का श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया गया।
गोंडवाना राजवंश की ऐतिहासिक धरोहर है देवठाना
बस्तीपाली ऐतिहासिक रूप से फुलझर रियासत की प्राचीन राजधानी रही है। स्थानीय ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, तत्कालीन गोंडवाना शासनकाल में राजा जगसाय जगत और राजमाता सागुन कुमारी देवी जगत के समय यहां जगत राजवंश का वैभवशाली राजप्रासाद संचालित था। इसी राजवंश की अधिष्ठात्री कुलदेवी आदिशक्ति माता इक्कीसो बहिनियां देवठाना तथा भगवान जगन्नाथ मंदिर आज भी क्षेत्र की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक के रूप में विद्यमान हैं। मंदिर परिसर को पंडा-पुजारियों और ग्रामवासियों के सहयोग से संरक्षित रखा जा रहा है।
हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन राजमहल वर्तमान में खंडहर और भग्नावशेष की स्थिति में पहुंच चुका है। देखरेख के अभाव में इसकी ऐतिहासिक पहचान प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने राजमहल के संरक्षण, अतिक्रमण पर रोक और कथित तोड़फोड़ एवं खुदाई जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण की आवश्यकता जताई है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
नवरात्रि में अखंड ज्योति और पारंपरिक पूजा का विधान
माता इक्कीसो बहिनियां देवठाना शक्ति उपासकों की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिवर्ष चैत्र वासंतीय और आश्विन शारदीय नवरात्रि के दौरान जगत वंशजों, यज्ञमानों, बैगा-भूमका, गायता तथा पंडा-पुजारियों द्वारा पूर्वजों की परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। 21 देवीय शक्तियों के नाम से मनोकामना अखंड दीप-ज्योति प्रज्ज्वलित कर प्रतिदिन माता का श्रृंगार, पूजन-पाठ और आरती की जाती है।
विजयादशमी के पावन अवसर पर मुख्य यज्ञमान एवं संरक्षक अमृतलाल जगत, श्रीमती नोविना जगत, दौलतराम जगत, श्रीमती निरूपा जगत, उत्तम सिंह जगत और श्रीमती पांचोंबाई जगत की सहभागिता रही। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, छत्तीसगढ़ प्रदेश से जुड़े संयोजक एवं सूत्रधार राजेन्द्र सिंह सिदार, सिरहा-बैगा तथा पंडा-पुजारी विदेशीराम यादव और सुदेशीराम यादव के सानिध्य में देवी शक्तियों के आवाहन और मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ।
21 कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर किया पूजन
अनुष्ठान के दौरान शंख, घंट और अन्य मांगलिक ध्वनियों के बीच हवन-यज्ञ कर विश्व कल्याण एवं शांति की कामना की गई। पूर्णाहुति के बाद माता रानी की महाआरती की गई। राजबाड़ा की पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र पूजा के अंतर्गत खड्ग, तलवार, भाला, बरछी, धनुष और तीर-कमान का पूजन किया गया। इसके साथ ही नई फसल के प्रतीक धान की पहली बालियों का अर्पण कर गोंडवाना की पारंपरिक नवाखाई परंपरा के अनुसार नवान्न भोग समर्पित किया गया।
धार्मिक अनुष्ठान में 21 नन्हीं कन्याओं को देवी माताओं का प्रतिरूप मानकर उनका पूजन और श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात भोग-प्रसाद अर्पित कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण एवं भोग-भंडारे का आयोजन हुआ। नौ दिनों तक देवी व्रत रखने वाले महिला और पुरुष उपासकों ने विधि-विधान से मनोकामना व्रत का उद्यापन किया।
ग्रामवासियों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
माता सेवा, देवजातरा और नवरात्रि के इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में समाजसेवी गोकुल पारेश्वर, क्षेत्रोलाल सिदार, शंखलाल जगत, सुभाष सिदार, मनोज सिदार, प्रेमसिंह जगत, हेतराम जगत, बिहारीलाल खम्हारी, दुर्योधन बारिक, अक्षय दास, सत्यवान दास, श्याम दास, जीवनलाल चौधरी, सेतकुमार चौधरी, देवभोज यादव, भीष्मदेव यादव, उग्रसेन यादव, सूरज यादव, दिनेश यादव, सुशीला यादव, सुकांति यादव, अंजना यादव, रुक्मिणी चौधरी, गौरी यादव, रजनी यादव, हेमबाई यादव, संगीता यादव, सविता बरिहा, नलिनी वैष्णव, दिव्या जगत, पारुल जगत, सुमित्रा जगत, सुबनी जगत, पीली जगत, कौशिकदास मानिकपुरी और हृषिकेश दीप सहित बस्तीपाली के समस्त ग्रामवासियों का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सहयोग रहा।
श्रद्धालुओं की सहभागिता और ग्रामवासियों के सामूहिक प्रयास से माता इक्कीसो बहिनियां देवठाना में नवरात्रि का धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। आयोजन ने क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और गोंडवाना की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की प Llरंपरा को पुनः रेखांकित किया।



