शासकीय महाविद्यालय सरायपाली में ‘मोल डे’ पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित, विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान के महत्व से कराया अवगत
आयुष साहू 9926141516

प्राचार्य डॉ. संध्या भोई ने कहा—मोल संकल्पना सूक्ष्म और विशाल दुनिया के बीच का सेतु, वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को बढ़ावा देना जरूरी
सरायपाली। स्वर्गीय राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली के रसायन शास्त्र विभाग में प्राचार्य डॉ. संध्या भोई के निर्देशन एवं विभागाध्यक्ष शब्या पटेल के मार्गदर्शन में ‘मोल डे’ के अवसर पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अनिल गुप्ता, अक्षय कुमार साहू एवं पीतांबर बाघ ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यादायिनी मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान में मोल संकल्पना के महत्व, वैज्ञानिक उपयोगिता तथा दैनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में रसायन विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना तथा विषय की जटिल अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से समझाना था।
सूक्ष्म और विशाल दुनिया के बीच सेतु है मोल
रसायन विज्ञान हमारे आसपास मौजूद प्रत्येक पदार्थ की प्रकृति, संरचना और व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परमाणु और अणु इतने सूक्ष्म होते हैं कि उन्हें सामान्य आंखों से देखना या साधारण तराजू पर तौलना संभव नहीं है। ऐसे में पदार्थों की मात्रा को समझने और उनकी गणना करने के लिए मोल एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक इकाई है। इसी संकल्पना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 23 अक्टूबर को मोल दिवस मनाया जाता है। इसे प्रचलित रूप से सुबह 6:02 बजे से शाम 6:02 बजे तक मनाया जाता है, जो आवोगाद्रो संख्या से जुड़ा है।
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने पर दिया जोर
विभागाध्यक्ष शब्या पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि मोल दिवस आवोगाद्रो संख्या के सम्मान में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में शिक्षकों ने विद्यार्थियों के मन से रसायन विज्ञान का डर दूर करने और विषय के प्रति आकर्षण बढ़ाने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे रचनात्मकता, जिज्ञासा और उत्साह के साथ भी समझा जा सकता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
आधुनिक विज्ञान में मोल संकल्पना की अहम भूमिका : डॉ. संध्या भोई
प्राचार्य डॉ. संध्या भोई ने कहा कि मोल केवल एक सैद्धांतिक परिभाषा या परीक्षा में पूछे जाने वाला प्रश्न नहीं है, बल्कि यह सूक्ष्म और विशाल दुनिया के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। यह रसायन विज्ञान को प्रयोगशाला की परखनली से निकालकर वास्तविक जीवन की गणनाओं से जोड़ता है। जीवन रक्षक दवाइयों के सटीक निर्माण, रॉकेट के ईंधन के संतुलन तथा औद्योगिक उत्पादन जैसे अनेक क्षेत्रों में मोल संकल्पना की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बिना आधुनिक विज्ञान की कल्पना करना कठिन है।
उन्होंने जीवन को रासायनिक अभिक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि यदि हमारे विचार, कर्म और संकल्प सही अनुपात में संतुलित हों, तो परिणाम सकारात्मक और ऊर्जावान हो सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान की दुनिया को समझने, नई खोजों के प्रति जिज्ञासा बनाए रखने तथा ज्ञान के प्रसार में योगदान देने का आह्वान किया।
निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम के अंतर्गत रसायन शास्त्र विभाग की ओर से निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों को अपनी विचारशीलता, रचनात्मकता और विषय की समझ प्रस्तुत करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन पीतांबर बाघ ने किया तथा आभार प्रदर्शन अनिल गुप्ता ने किया। आयोजन ने विद्यार्थियों में रसायन विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया।



